आंतरिक बल -मनचाही प्राप्ति और कुदरती नियम -सम्मोहन -दूरस्थ व्यक्ति को संदेश

आंतरिक बल 

-मनचाही प्राप्ति  और कुदरती नियम 

-सम्मोहन -दूरस्थ  व्यक्ति को संदेश 

-प्रत्येक मनुष्य के शरीर से गंध निकलती रहती है । जिसे पसीना कहते है । 

-हमारे  मन में जो संकल्प चलते है,  उन संकल्पों का यह सूक्ष्म और तरल रूप है । 

-अगर हमारे  संकल्प शुध्द होते है तो यह सुगंध के रूप में बाहर  निकलते है ।  अगर बुरे विचार  होते है तो यह दुर्गंध फैलाते  है । 

-यह सुगंध या दुर्गंध  व्यक्ति के कपड़ों और आसपास के वातावारण  पर असर डालते  है ।  यही सम्मोहन या विकर्षण का कारण  बनते  हैं  । 

-प्राचीन आश्रमों में शेर और  बकरी एक घाट  पर पानी  पीते थे । नेवला वा  सर्प एक वृक्ष की छाया  के नीचे बैठते थे । 

-ऋषियों की तपस्या के कारण उनके  संकल्प बहुत  सात्विक होते थे । उन के  संकल्पों से सात्विक सुगंध निकलती थी,  जो सम्मोहन का कार्य  करती थी । जिस से हिंसक प्रणियों का वैर  भाव  मिट जाता  था । 

-श्री कृष्ण को सम्मोहन का आविष्कारक माना  जाता  है । 

-जो दूसरों को अपनी ओर आकर्षित करें, वही श्री कृष्ण वा  देवी या देवता है । 

-श्री कृष्ण ने सारे  गोकुल,  मथुरा,  वृंदावन को सम्मोहित कर रखा था । 

-गोपियां इतनी बेसुध हो जाती  थी कि  उन्हें  अपने वस्त्र,  काम  काज,  लोकलाज और लोकनिंदा का ध्यान नहीं रहता था । 

-स्त्री पुरुष का भेदभाव मिट जाता  था ।  काल  वा  समय की सीमा भी प्रभावहीन  हो जाती  थी । 

-स्वामी विवेकानंद हजारों लाखों लोगों को प्राभावित  कर देते थे ।  ये प्रभाव  और कुछ नहीं उनका सम्मोहन ही था जो उन्होंने तप से प्राप्त  किया था । 

-उन्हें  मिलने के लिये अंग्रेज लाइन  बना कर खड़े होते थे ।  स्वामी जी जैसे ही उनके पास  से गुजरते थे उन अंग्रेजों के विचार  बदल जाते  थे ।  यह सिर्फ उनकी सम्मोहन शक्ति के कारण  ही था । 

-ब्रह्मा कुमारीज की पूर्व अध्यक्षा पूजनीय दादी  प्रकाशमनी जी  का क्या ओज था क्या बोल था सभी उनकी तरफ खींचे चले जाते  थे ।  यह दादी  जी का सम्मोहन ही था । 

-यह शक्ति हम सब में है । 

-आज भी प्रेमी प्रेमिका एक दो के प्यार  में जान  तक न्यौछावर कर देते है ।  यह प्यार  ही सम्मोहन है । प्रेम में हम मन में बहुत  मीठे मीठे बोलते हैं । 

-हम सभी भी किसी ना किसी से प्रभावित  होते है ।  उनकी तरफ आकर्षित होते  चले जाते  है ।  उनके प्रति बहुत  सॉफ्ट कार्नर रखते है ।  यह सब सम्मोहन ही है । 

-यह सब उदाहरण सिद्व करते है कि  सम्मोहन और कुछ नहीं सिर्फ मीठे संकल्प हैं  जिन में संदेश होता  है  कि आप हमें पसंद हो ।  आप के साथ  प्यार  है ।  आप से शांति मिलती है,  सकून मिलता है,   कोई डर नहीं,  कोई भेदभाव नहीं,  उंचनीच नहीं सिर्फ कल्याण ही कल्याण  है ।  इस से इतनी शक्ति उत्पन होती है कि  कोई भी व्यक्ति/सभी लोग सम्मोहित हो जाते  है । 

-कहते है सम्मोहन घोर तप से  या भगवान  की याद से पैदा  होता है । यह भी सच्च है कि   तप सभी लोग नहीं कर सकते । 

-अगर एक साधारण  व्यक्ति मन के अंदर कोई एक सात्विक  विचार  जैसे भागवान  आप शांति के सागर  है या कहे  प्रेम के सागर  हैं,  इसे ही रिपीट करता रहे या कोई और अच्छा  संकल्प  दोहराता  रहे,  चाहे  परिस्थिति कैसी  भी हो तो उसमें भी वही सम्मोहन आ जायेगा जो विवेकानंद में था  या प्राचीन  ऋषियों में था । 

-मैंने अभ्यास में देखा है कि अगर हम एक दिन में दस हजार  बार  कोई एक  सात्विक संकल्प रिपीट कर ले या 25 पेज अव्यक्त मुरली पढ़ दे तो उस से इतना  सम्मोहन का बल उत्पन होता है कि  एक दिन मन किसी बुराई की तरफ नहीं भागता ।

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