आंतरिक बल -मनचाही प्राप्ति और कुदरती नियम

आंतरिक बल 

-मनचाही प्राप्ति और कुदरती नियम 

-शक्तिपात -2

-भारत  में शक्तिपात  का बहुत गायन है । 

- स्वामी राम  कृष्ण  परमहंस ने स्वामी  विवेवकानन्द को दिव्य  शक्तियां  दी, जिस से वे विश्व प्रसिद्ध  हो गये  ।

-प्रायः  लोग गुरूओं  से  ऐसा  ही दिव्य शक्तिपात  चाहते है ताकि  मेहनत  ना करनी पड़े और वे विश्व में प्रसिद्ध  हो जाये ।

-ये दिव्य शक्तियां संसार का प्रत्येक व्यक्ति प्राप्त  कर सकता है ।  परंतु उसके लिये मनुष्य को  अपनी योग्यता सिद्व करनी होती है ।  एक जिले का डिप्टी कमिशनर वही व्यक्ति बनेगा जिस के पास  आई ए  एस जैसी डिग्री  और निर्धारित  अनुभव हो । 

-शक्तिपात  की योग्यता हासिल  करना अर्थात दातापन  की भावना को विकसित करना । 

-हरेक मनुष्य में दातापन की कुछ ना कुछ  भावना रहती है ।  

-प्रत्येक व्यक्ति अपने सम्पर्क में आने वाले मनुष्यों को  हर क्षण या तो कुछ  दे  रहा  है या  ले  रहा  है । 

-हमें हर पल  मन द्वारा,  मुख द्वारा,  आंखों द्वरा और स्पर्श द्वारा  विश्व का कल्याण करना है बस यही योग्यता  सिद्व करनी है । 

-आप सब महसूस करते है जब हम किसी से मिलते है तो हम उसे प्रभावित करते  है या उससे प्रभावित  हो रहे होते है । यह प्रभाव  जब अच्छाई  के लिये प्रेरित करता है तो  शक्तिपात  है ।   

-जब हम किसी से मिलते तो हम उसके बारे  सोचते है और वह हमारे बारे सोचता है । 

- जेसे ही हम किसी के बारे सोचते है तो हमारा सूक्ष्म बल उनको जाता है । यदि हम कल्याणकारी  सोचते है तो वह व्यक्ति शक्तिवान  बनता  है  । अगर बुरा सोचते है तो वह आत्मा  श्रापित  होती है । हमें मन द्वारा  सदा दूसरों का कल्याण करना है यही शक्तिपात  है । 

-आँखो से सूक्ष्म प्रकाश निकलता है, जिसमे मन की अच्छी   व  बुरी शक्ति भरी होती है । जिसको भी देखते है या आइ  कनटेक्ट  करते है उसमे हमारे विचारो की शक्ति चली जाती  है । हमें सदैव आंखों द्वारा  दूसरों का कल्याण करना है । यही शक्तिपात है । 

- हम जो  बोल बोलते है उनमे मन की शक्ति भरी होती है । तथा  वह शक्ति सुनने वाले  व्यक्ति /व्यक्तियों  में चली जाती है । हमें सदा मधुर बोल बोलने है ।  यही शक्तिपात  है ।  

-हमारे हाथो की उँगलियों  के पोरों से शक्ति प्रवाहित होती रहती है । जैही  हम किसी को आशीर्वाद देते है,  तो सूक्ष्म विद्युत दूसरे व्यक्ति में जाती  है ।   ये भी शक्तिपात है  । 

-बस हमें इंही क्षेत्रों में विकसित करना है । अपने को सम्पन्न बनाना  है । 

-जिस से भी मिलों  उसे अचछा अनुभव हो । 

-यदि आप को अच्छा अच्छा महसूस होता है,  हर समय खुशी रहती है,  उत्साह रहता है,  सबके प्रति प्यार  उमड़ता रहता है,  योग में बैठते है और ऐसे लगता है मैं धरती से ऊपर उठ गया  हूं,  योग में झटके से लगते है,  योग में बैठते हैं  और अपने आप आगे की तरफ झुक जाते  है  तो समझो आप पर ईश्वर का  शक्तिपात  हो रहा  है ।

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